लंगोट - सुभाष पाण्डेय
मक्खड़ पहलवान। एही नाँव से उनुके सभे बोलावे स्कूल में। पढ़े - लिखे में जेहे - सेहे। पहलवानी में खूब मन लागे। रोज अखाड़ा पर जा के दू - तीन घं...
मक्खड़ पहलवान। एही नाँव से उनुके सभे बोलावे स्कूल में। पढ़े - लिखे में जेहे - सेहे। पहलवानी में खूब मन लागे। रोज अखाड़ा पर जा के दू - तीन घं...
फुलेसर के बेटा के देखनहरू उनके भितरिहा टोह लेबे खातिर बुधन की दुकान पर जा के पहिले त बिना गरजे कई चीज के भाव पुछलें, फिनु बिना मन के दू-चार ...
'तू आपन रहनि सुधरबऽ कि हम कहीं जा के डूबि - धसि जाईं?' - आजु सुनरी अपना मरद से बहुते कड़क सुर में पुछली। 'हमरा रहनि में का भइल ब...
जब रात में शहर के रोशनी एक-एक कऽ के जल उठेला तऽ लागेला कि धरती पर तारा उतर आइल होखे। हर फ्लैट के खिड़की से पीयर-पीयर रोशनी बाहर झरेला, आ दूर...
रोपेया के चमक-दमक जब आपन रुप देखावे ला त मति फिरि जाला,आंखि प गुरुर के छोपनी चढ़ि जाला,मति उलुटा हो जाला आ मन बेलाम घोड़ा बन जाला।बड़का- बड़...
बुधन फुलेसर के घरे औचक पहुँचलें। पहुँचते बइठे खातिर कुर्सी दियाइल। बुधन आराम से बइठि के एन्ने - ओन्ने ताकत नाक - भौं सिकोरत बिना लाग - लपेट ...
शहर के चमक जब आँख ले चहुँपे ला तऽ पहिले नजर चौधिंया जाला। बहुत देर कुछ लउकबे ना करेला। बाकिर धीरे-धीरे जब आँख ओह चमक के सोख लेला तऽ बुझाला क...
जब ऊँच-ऊँच मकान लउके लागे तऽ मन कह देला कि शहर आ गइल बा। आ जब मकान दस-बीस तल्ला होखे तऽ लाग जाला कि केवनो राजधानी में पहुँच गइल बानी। दिल्ली...
रामनवमी के दिन रहे। शिव-लगन बो अहिरिन के, देवास लागल रहे। ऊ नहाइ धोयाइ के, नया लूगा झुला पहिर के, मूडी गडले बइठल रहली। माता मइया के, आवही के...
प्रेम एगो अइसन लड़िका जिनका पर घर परिवार के पूरा जिम्मेदारी रहे, ऊ अपना परिवार में बड़ रहले एहिसे उनका हर चीझु के ख्याल रखे के रहे,अपना परिवार...
राजू आज परदेश से अपना देश जा तारें। वइसे त राजू के ऑफिस बम्बई में बा बाकिर ऑफिस का काम से हफ्ता - दस दिन खातिर विदेश जात आवत रहेलें। ई पहिला...
नेता जी सोमार के गाँव में वोट माँगे आवेवाला रहनीं। अतवारे के साँझि के नेता जी के खास पूरन घर-घर फूल के माला बाँटत रहलें। पूरन के गिनती गाँव ...
अंडा बेचे वाली मनोरमा पहिले अंडा ना बेचत रही. उ एगो घरेलू महिला रही, जे अपना मरद भूलन आ बेटी आरती के साथे खूब बढ़िया से आत्मसम्मान के जिनिगी...
रामजी आउर केहू ना हमरा गाँव में के एगो आदमी के नाम ह। आ ई रामजी केहू के जरताह आंँखीं से कबो ना ताकस। खेतिहर आदमी हवन।बधार के चारों सिवान में...